सात निश्चय 3.0 (Saat Nischay 3.0) के तहत इन निर्माणाधीन विद्यालयों में छात्रों को बेहतरीन सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन साथ ही इन स्कूलों में शिक्षक बनना भी अब आसान नहीं होगा।
आइए जानते हैं इन मॉडल स्कूलों की खासियत और शिक्षकों के चयन की नई प्रक्रिया:
मॉडल स्कूलों में रहेगी 100% एकरूपता
शिक्षा मंत्री के अनुसार, राज्य के सभी मॉडल स्कूलों में एकरूपता (Uniformity) अनिवार्य है। इसका मतलब है कि:
- प्रत्येक मॉडल स्कूल के वर्ग कक्ष में छात्र और शिक्षक की संख्या एक समान होगी। ऐसा नहीं होगा कि कहीं कम विद्यार्थी हों और कहीं अधिक।
- सभी स्कूलों में आवश्यक सभी विषयों के शिक्षक अनिवार्य रूप से नियुक्त किए जाएंगे।
छात्रों को मिलेंगी ये विश्वस्तरीय सुविधाएं
इन स्कूलों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि सर्वांगीण विकास के लिए तैयार किया जा रहा है। स्कूलों में सुनिश्चित किया जाएगा:
- खेल-कूद की पर्याप्त सामग्री।
- समय पर पाठ्य-पुस्तकें और छात्राओं के लिए सेनेटरी नैपकिन की उपलब्धता।
- 100% बच्चों का आधार सीडिंग।
- स्वच्छ शौचालय और पीने के पानी की उचित व्यवस्था।
- स्कूल परिसर में पौधारोपण और गुणवत्तापूर्ण मिड-डे मील (MDM)।
शिक्षक बनने के लिए पार करनी होगी 100 अंकों की कड़ी चुनौती
मॉडल स्कूल में शिक्षक बनने की प्रक्रिया को पूरी तरह से अंक आधारित और कई स्तरों वाला बना दिया गया है। शिक्षकों को कुल 100 अंकों के मूल्यांकन से गुजरना होगा, जिसे 4 प्रमुख भागों में बांटा गया है:
- शैक्षणिक योग्यता (40 अंक): इसमें स्नातक, स्नातकोत्तर, बीएड-एमएड, एमफिल, पीएचडी और राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय पुरस्कारों को मापदंड में शामिल किया गया है।
- शिक्षण अनुभव (30 अंक): आपके पढ़ाने के अनुभव के आधार पर अंक दिए जाएंगे।
- साक्षात्कार (20 अंक): ज्ञान, समझ, उपयुक्तता और कौशल को परखने के लिए इंटरव्यू होगा।
- पूर्व प्रदर्शन (10 अंक): शिक्षक के पुराने रिकॉर्ड और प्रदर्शन का मूल्यांकन।
(नोट: आवेदकों को प्रत्येक दावे के लिए सक्षम प्राधिकारी—जैसे DEO, हेडमास्टर, बोर्ड या विवि—से प्रमाणित स्व-अभिप्रमाणित दस्तावेज़ जमा करने होंगे।)
कौन करेगा शिक्षकों का चयन?
जिले भर के मॉडल विद्यालयों के लिए (जैसे पटना में 153 शिक्षकों का चयन) एक पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है।
- अध्यक्ष: उप विकास आयुक्त (DDC)
- सदस्य सचिव: जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO)
- अन्य सदस्य: DM द्वारा नामित महिला पदाधिकारी, जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के प्राचार्य और DM द्वारा मनोनीत किसी केंद्रीय विद्यालय (KV) / नवोदय / सैनिक स्कूल के प्राचार्य।
निष्कर्ष:
बिहार सरकार का यह कदम शिक्षा के स्तर को सुधारने और योग्य शिक्षकों को आगे लाने की एक बेहतरीन पहल है। इससे न केवल ग्रामीण और प्रखंड स्तर के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि स्कूलों में अनुशासन और सुविधाओं का भी नया मानक स्थापित होगा।
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